सांख्यिकी
सांख्यिकी आँकड़े एवं उनकी विशेषताएँ
आँकड़े को एकत्र करना, वर्गीकृत करना तथा उनका विश्लेषण करना
अवगुणित आँकड़े की बारंबारता सारणी बनाना
अवगुणित आँकड़े के ग्राफ (पाई चार्ट) बनाना
अवगुणित आँकड़े के ग्राफ (बार ग्राफ) बनाना
अवगुणित आँकड़े का त्रि-आयामी ग्राफ बनाना तथा उसका विश्लेषण करना
4.1 भूमिका :
आपने टेलीविजन और समाचार पत्र में क्रिकेट का स्कोर बोर्ड अवश्य देखा होगा। इस स्कोर बोर्ड में पूरे खेल का परिणाम दिखाया जाता है। खेल में कौन, कितने रन से जीता या हारा, इस सूचना के अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण और उपयोगी सूचनाएँ भी होती हैं।
क्रिकेट में खिलाड़ियों के नाम, कितने रन बनाए और सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी ने कितनी गेंदों में रन बनाए, कुल कितना समय लिया, आदि के बारे में समाचार-पत्र में एक स्कोर बोर्ड नीचे दिखाया गया है।
आपके क्षेत्र के शिक्षकों के द्वारा शिक्षा के स्तर का अध्ययन करने के लिए एक रजिस्टर में अंकित किया जाता है तथा परीक्षा के बाद क्षेत्र के शिक्षा के स्तर के अंकों को भी एक रजिस्टर में अंकित किया जाता है आपने अवश्य देखा होगा। शिक्षा के स्तर के आंकड़े शिक्षा विभाग, प्रकाशन, टेलीविजन और अन्य संचार साधनों से व्यापक रूप से एकत्र किए जाते हैं। आप यह भी जानते हैं कि सभी आंकड़े हमें किसी न किसी विषय की सूचना अवश्य देते हैं।
इसी तरह आपने अपने दैनिक जीवन में संख्या की तालिका के रूप में विषय और उसके मूल्य, रेल के आने-जाने का समय तथा बस के आने-जाने के समय आदि को देखा होगा। ये सारिणियाँ हमें आंकड़े (DATA) प्रदान करती हैं।
आंकड़े संख्या के वे संग्रह हैं जो कुछ सूचनाएँ देने के लिए एकत्रित किए जाते हैं। किसी विशिष्ट उद्देश्य से आंकड़े एकत्रित किए जाते हैं।
4.2 आँकड़े की विशेषताएँ
सोचिए, तुलना कीजिए और निष्कर्ष निकालिए -
•
हम जानते हैं कि किसी देश में एक हेक्टेयर गेहूँ की उपज एक वर्ष में एक समान नहीं रहती है, बढ़ या घट सकती है। इसी तरह एक देश में एक हेक्टेयर गेहूँ की उपज और दूसरे देश में एक हेक्टेयर गेहूँ की उपज में अंतर हो सकता है अतः आंकड़े परिवर्तनशील होते हैं।
•
एक अन्य उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए कि किसी कक्षा के एक छात्र के गणित, दूसरे छात्र के विज्ञान और तीसरे छात्र के अंग्रेजी के अंकों की तुलना करनी है, तो इससे कोई निष्कर्ष नहीं निकलेगा, किंतु यदि तीनों छात्रों के केवल एक विषय, गणित, विज्ञान अथवा अंग्रेजी के अंकों की तुलना करनी हो तो इससे यह निष्कर्ष निकल सकता है कि उस विषय में किस छात्र का प्रदर्शन बेहतर है। इस तरह हम देखते हैं कि सजातीय आंकड़े होने पर ही हम किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं।
•
मान लीजिए कि किसी कक्षा में छात्रों की ऊँचाई का अध्ययन करना है तो इसके लिए कक्षा के सभी छात्रों की ऊँचाई मापनी होगी और तभी विश्लेषण करके कोई अनुमान या निष्कर्ष निकाल सकते हैं। एक छात्र की ऊँचाई अथवा केवल एक आंकड़े से तुलना नहीं की जा सकती, तुलना के लिए आंकड़े सदैव समूह में होने चाहिए।
•
जो तथ्य संख्या में नहीं लिखे जा सकते उनका अध्ययन सांख्यिकी के अंतर्गत हम नहीं कर सकते, जैसे ईमानदारी, सच्चाई, चरित्र आदि।
निष्कर्ष:
आँकड़े परिवर्तनशील होते हैं। सजातीय आँकड़े होने पर ही तुलना करके निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। आँकड़े सदैव समूह में एकत्रित किए जाते हैं। आँकड़े सदैव संख्यात्मक रूप में होते हैं।
4.5 आँकड़े का संग्रह:
किसी समस्या के अध्ययन में अध्ययनकर्ता का सबसे पहला कार्य आँकड़े का संग्रह करना है। आँकड़े को इकट्ठा करने से पहले हमें यह जानना आवश्यक है कि हम इनका उपयोग किसके लिए करेंगे।
गतिविधि:
अपनी कक्षा के तीन समूह बनाइए। प्रत्येक समूह से निर्धारित किए गए आँकड़े में से एक आँकड़े को एकत्रित कीजिए:
(i)अपनी कक्षा के दस छात्रों की ऊँचाई,
(ii)किसी एक दिन दिए गए गृहकार्य को करके लाने वाले छात्रों की संख्या,
(iii)किसी एक माह में प्रत्येक कार्यदिवस में उपस्थित रहने वाले अपनी कक्षा के छात्रों की संख्या।
पहले समूह के छात्रों ने स्वयं आँकड़े एकत्रित किए जैसे - छात्रों की ऊँचाई मापना, दूसरे समूह के छात्रों ने दूसरे स्रोत से आँकड़े एकत्रित किए। जैसे - उपस्थित छात्रों की संख्या अपनी कक्षा की उपस्थिति पंजिका से।
अतः आँकड़े का संग्रह दो तरह से किया जाता है:
(i)प्राथमिक स्रोत से
(ii)द्वितीयक स्रोत से
जिस स्रोत से पहली बार आँकड़े एकत्रित किए जाते हैं उसे प्राथमिक स्रोत कहते हैं तथा जिस स्रोत से पहले से उपलब्ध आँकड़े से कुछ आँकड़े लिए जाते हैं, वे द्वितीयक स्रोत कहलाते हैं।
इस तरह आँकड़े भी दो तरह के संग्रह होते हैं।
प्राथमिक आँकड़े:
जब कोई शोधकर्ता किसी उद्देश्य